Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.41: उपाध्याय के ऐसा कहने पर उपमन्यु ने उनसे कहा - 'भगवन्! मैं पहले जो भिक्षा लाया हूँ, उसे आपको अर्पित करता हूँ तथा अपने लिए दूसरी भिक्षा लाता हूँ और उसी से अपना जीविकोपार्जन करता हूँ।'॥41॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपाध्याय के ऐसा कहने पर उपमन्यु ने उनसे कहा - 'भगवन्! मैं पहले जो भिक्षा लाया हूँ, उसे आपको अर्पित करता हूँ तथा अपने लिए दूसरी भिक्षा लाता हूँ और उसी से अपना जीविकोपार्जन करता हूँ।'॥41॥
On Upadhyaya saying this, Upamanyu replied to him - 'Lord! I offer the alms I have brought earlier to you and bring another alms for myself and from that I earn my living.'॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥