Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.38: यह सुनकर उपाध्याय ने उपमन्यु से कहा, ‘भिक्षा में प्राप्त अन्न को मुझे अर्पित किए बिना तुम उसका उपयोग न करो।’ उपमन्यु ने उनकी आज्ञा स्वीकार करते हुए कहा, ‘बहुत अच्छा।’ अब वह भिक्षा लाकर उपाध्याय को देने लगा। | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर उपाध्याय ने उपमन्यु से कहा, ‘भिक्षा में प्राप्त अन्न को मुझे अर्पित किए बिना तुम उसका उपयोग न करो।’ उपमन्यु ने उनकी आज्ञा स्वीकार करते हुए कहा, ‘बहुत अच्छा।’ अब वह भिक्षा लाकर उपाध्याय को देने लगा।
Hearing this, the Upadhyaya said to Upamanyu, 'You should not use the food received as alms without offering it to me.' Upamanyu accepted his command saying, 'Very good.' Now he started bringing alms and offering it to the Upadhyaya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥