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mahabharat 1.3.33: आरुणि उपाध्याय के आशीर्वाद से कृतज्ञ होकर अपने इच्छित देश को चले गए। उन्हीं अयोधौम्य उपाध्याय का उपमन्यु नाम का एक और शिष्य था ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.3.33 
स एवमुक्त उपाध्यायेनेष्टं देशं जगाम। अथापर: शिष्यस्तस्यैवायोदस्य धौम्यस्योपमन्युर्नाम॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
आरुणि उपाध्याय के आशीर्वाद से कृतज्ञ होकर अपने इच्छित देश को चले गए। उन्हीं अयोधौम्य उपाध्याय का उपमन्यु नाम का एक और शिष्य था ॥33॥
 
Aruni was grateful to Upadhyaya for his blessings and went to his desired country. The same Ayoddhaumya Upadhyaya had another disciple named Upamanyu. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)