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mahabharat 1.3.2: जनमेजय के भाइयों ने कुत्ते को मार डाला। फिर वह रोता हुआ अपनी माँ के पास गया।   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.3.2 
स जनमेजयस्य भ्रातृभिरभिहतो रोरूयमाणो मातु: समीपमुपागच्छत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय के भाइयों ने कुत्ते को मार डाला। फिर वह रोता हुआ अपनी माँ के पास गया।
 
Janamejaya's brothers killed the dog. Then he went to his mother crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)