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mahabharat 1.3.187: उस समय राजा जनमेजय ने अत्यन्त दुःखी होकर उत्तंक के पास उपस्थित मन्त्रियों से अपने पिता की मृत्यु का समाचार पूछा।   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  1.3.187 
अपृच्छत् स तदा राजा मन्त्रिणस्तान् सुदु:खित:।
उत्तङ्कस्यैव सांनिध्ये पितु: स्वर्गगतिं प्रति॥ १८७॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा जनमेजय ने अत्यन्त दुःखी होकर उत्तंक के पास उपस्थित मन्त्रियों से अपने पिता की मृत्यु का समाचार पूछा।
 
At that time King Janamejaya, being very sad, asked the ministers near Uttanka about the news of his father's death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)