श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  1.3.156 
उत्तङ्क एनमेवाश्वमधिरोह त्वां क्षणेनैवोपाध्यायकुलं प्रापयिष्यतीति॥ १५६॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक! इस घोड़े पर चढ़ो, यह तुम्हें क्षण भर में उपाध्याय के घर पहुँचा देगा ॥156॥
 
‘Uttank! Get on this horse. It will take you to Upadhyaya's house in a moment.'॥ 156॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)