Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.128: स्नान और अर्घ्य आदि समस्त जल-संबंधी क्रियाएँ संपन्न करके, उत्तंक ने शुद्ध और पवित्र होकर देवताओं और अपने गुरुजनों को प्रणाम किया। वे जल से बाहर आए और बड़े वेग से क्षपणक का पीछा किया। | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्नान और अर्घ्य आदि समस्त जल-संबंधी क्रियाएँ संपन्न करके, उत्तंक ने शुद्ध और पवित्र होकर देवताओं और अपने गुरुजनों को प्रणाम किया। वे जल से बाहर आए और बड़े वेग से क्षपणक का पीछा किया।
After completing all water-related activities like bathing and offering of water, Uttanka became pure and holy and then bowed to the gods and his teachers. He came out of the water and chased Kshapanaka with great speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥