Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.119: वह भोजन किसी स्त्री ने खुले केशों वाली स्त्री से बनाया था। अतः उसमें बाल गिर गए थे। बहुत देर तक पकाए जाने के कारण वह ठंडा भी हो गया था। अतः वह अशुद्ध है। इस निष्कर्ष पर पहुँचकर राजा ने उत्तंक ऋषि को प्रसन्न करके कहा -॥119॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह भोजन किसी स्त्री ने खुले केशों वाली स्त्री से बनाया था। अतः उसमें बाल गिर गए थे। बहुत देर तक पकाए जाने के कारण वह ठंडा भी हो गया था। अतः वह अशुद्ध है। इस निष्कर्ष पर पहुँचकर राजा ने उत्तंक ऋषि को प्रसन्न करके कहा -॥119॥
That food was prepared by a woman with open hair. Hence, hair had fallen in it. Since it was cooked for a long time, it had also become cold. Hence, it is impure. After reaching this conclusion, the king pleased Uttanka Rishi and said -॥ 119॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥