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श्लोक 1.26.8  |
तदा भूरभवच्छन्ना जलोर्मिभिरनेकश:।
रामणीयकमागच्छन् मात्रा सह भुजङ्गमा:॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय समस्त पृथ्वी जल की असंख्य तरंगों से आच्छादित थी। इस प्रकार वर्षा से तृप्त होकर सर्प अपनी माता के साथ रमणीयक द्वीप पर आए। |
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| At that time the entire earth was covered with innumerable waves of water. Thus satisfied with the rain, the snakes came to the Ramaniyak island with their mother. 8. |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे षड्विंशोऽध्याय:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६॥
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