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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.25.2 
यत्र सा विनता तस्मिन् पणितेन पराजिता।
अतीव दु:खसंतप्ता दासीभावमुपागता॥ २॥
 
 
अनुवाद
जहाँ उसकी माँ विनता अत्यंत दुःखी और व्यथित थी क्योंकि वह खेल हार गई थी और उसके साथ दासी जैसा व्यवहार किया जा रहा था। 2.
 
Where his mother Vinata was extremely sad and distressed because she had lost the game and was treated like a slave. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)