श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  1.24.18-19 
प्रमतिरुवाच
तत: पितामहाज्ञात: सर्वं चक्रे तदारुण:॥ १८॥
उदितश्चैव सविता ह्यरुणेन समावृत:।
एतत् ते सर्वमाख्यातं यत् सूर्यं मन्युराविशत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्रमति कहते हैं - तत्पश्चात् पितामह ब्रह्माजी की आज्ञा से अरुण ने उसी समय उसी प्रकार सब कार्य किया। सूर्य अरुण से आच्छादित होकर उदय हुए। बेटा! सूर्य के क्रोध से युक्त होने के कारण के प्रश्न के उत्तर में मैंने ये सब बातें कही हैं॥18-19॥
 
Pramati says - Thereafter, Aruna did all the work in the same manner at that time on the orders of grandfather Brahmaji. The Sun rose covered by Aruna. Son! I have said all these things in answer to the question as to why the Sun was filled with anger.॥ 18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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