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श्लोक 1.24.12  |
अद्यार्धरात्रसमये सर्वलोकभयावह:।
उत्पत्स्यते महान् दाहस्त्रैलोक्यस्य विनाशन:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘देवताओं! आज मध्य रात्रि के समय एक महान अग्नि उत्पन्न होगी, जो सम्पूर्ण लोकों को भयभीत कर देगी और तीनों लोकों को नष्ट कर सकती है।’॥12॥ |
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| 'Gods! Today at midnight a great fire will occur which will frighten all the worlds and can destroy all the three worlds.'॥ 12॥ |
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