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श्लोक 1.24.11  |
तस्माल्लोकविनाशाय संतापयत भास्कर:।
ततो देवानुपागम्य प्रोचुरेवं महर्षय:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| और वहाँ से सूर्यदेव सम्पूर्ण जगत् का नाश करने के लिए सबको कष्ट देने लगे। तब महर्षियों ने देवताओं के पास जाकर इस प्रकार कहा- 11॥ |
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| And from there, Suryadev started tormenting everyone to destroy the entire world. Then the great sages went to the gods and said thus - 11॥ |
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