श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.24.11 
तस्माल्लोकविनाशाय संतापयत भास्कर:।
ततो देवानुपागम्य प्रोचुरेवं महर्षय:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
और वहाँ से सूर्यदेव सम्पूर्ण जगत् का नाश करने के लिए सबको कष्ट देने लगे। तब महर्षियों ने देवताओं के पास जाकर इस प्रकार कहा- 11॥
 
And from there, Suryadev started tormenting everyone to destroy the entire world. Then the great sages went to the gods and said thus - 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas