Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.230.5-6: जरिता बोली - बच्चो ! जब सब पक्षियों में श्रेष्ठ महाबली गरुड़ चूहे को बिल से निकालकर तेजी से उड़ रहा था, तब मैं भी उस तेज गति वाले गरुड़ के पीछे-पीछे गई और चूहे को बिल से निकालकर लाने के लिए उसे आशीर्वाद देते हुए बोली - ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.230: जरिता और उसके बच्चोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 230: जरिता और उसके बच्चोंका संवाद  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.230.5-6 
जरितोवाच
अहं वेगेन तं यान्तमद्राक्षं पततां वरम्।
बिलादाखुं समादाय श्येनं पुत्रा महाबलम्॥ ५॥
तं पतन्तं महावेगात् त्वरिता पृष्ठतोऽन्वगाम्।
आशिषोऽस्य प्रयुञ्जाना हरतो मूषिकं बिलात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जरिता बोली - बच्चो ! जब सब पक्षियों में श्रेष्ठ महाबली गरुड़ चूहे को बिल से निकालकर तेजी से उड़ रहा था, तब मैं भी उस तेज गति वाले गरुड़ के पीछे-पीछे गई और चूहे को बिल से निकालकर लाने के लिए उसे आशीर्वाद देते हुए बोली - ॥5-6॥
 
Jarita said - Children! When the mighty eagle, the best amongst all the birds, was flying swiftly with the mouse from its hole, I too followed that swift eagle and blessed him for taking the mouse from its hole and said -॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)