श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 230: जरिता और उसके बच्चोंका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.230.3 
संशयो वह्निरागच्छेद् दृष्टं वायोर्निवर्तनम्।
मृत्युर्नो बिलवासिभ्यो बिले स्यान्नात्र संशय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक आग पहुँचेगी या नहीं, इसमें संदेह है; क्योंकि देखा गया है कि वायु के वेग से आग दूसरी ओर मुड़ जाती है। परन्तु इसमें संदेह नहीं कि हम बिल में ही मर जाएँगे, क्योंकि उसके भीतर रहने वाले जीव हैं॥3॥
 
There is a doubt whether the fire will reach here; because it has been seen that the fire turns to the other side due to the force of the wind. But there is no doubt that we will die in the burrow because of the creatures living inside it. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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