श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 230: जरिता और उसके बच्चोंका संवाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.230.12 
शार्ङ्गका ऊचु:
न त्वं मिथ्योपचारेण मोक्षयेथा भयाद्धि न:।
समाकुलेषु ज्ञानेषु न बुद्धिकृतमेव तत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शारंगक ने कहा - माँ ! झूठे बहाने बनाकर हमें भय से मुक्त करने का प्रयत्न मत करो । संदेहपूर्ण कार्यों में संलग्न होना बुद्धिमानी नहीं है ॥12॥
 
Sharangak said - Mother! Do not try to free us from fear by making false excuses. It is not wise to engage in suspicious activities. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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