श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 230: जरिता और उसके बच्चोंका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.230.11 
जरितोवाच
अहं तमभिजानामि हृतं श्येनेन मूषिकम्।
नास्ति वोऽत्र भयं पुत्रा: क्रियतां वचनं मम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जरिता बोली, "बेटों! मुझे पता है, बाज ने चूहे को ज़रूर पकड़ लिया है। तुम सब मेरी बात मानो। इस बिल में तुम्हें डरने की कोई बात नहीं है।"
 
Jarita said - Sons! I know, the hawk has definitely caught the mouse. You all should listen to me. You have nothing to fear in this hole.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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