Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.23.7: वे आग के धधकते गोले की तरह चमक रहे थे और बेहद डरावने लग रहे थे। उनकी आँखें बिजली की तरह चमक रही थीं और लाल रंग की थीं। वे प्रलयकाल की आग की तरह धधक रही थीं और चमक रही थीं। | mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे आग के धधकते गोले की तरह चमक रहे थे और बेहद डरावने लग रहे थे। उनकी आँखें बिजली की तरह चमक रही थीं और लाल रंग की थीं। वे प्रलयकाल की आग की तरह धधक रही थीं और चमक रही थीं।
They shone like a blazing ball of fire and looked extremely terrifying. Their eyes shone like lightning and were of red colour. They were blazing and shining like the fire of the time of doomsday.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥