Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.23.6: वह अदम्य साहस और वीरता से संपन्न था। वह अपनी प्रभा से समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर रहा था। वह अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। वह जहाँ चाहे, जितनी जल्दी चाहे, जा सकता था और अपनी इच्छानुसार वीरता का प्रदर्शन कर सकता था। वह आकाश में उड़ते हुए एक पक्षी के रूप में प्रकट हुआ। | mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अदम्य साहस और वीरता से संपन्न था। वह अपनी प्रभा से समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर रहा था। वह अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। वह जहाँ चाहे, जितनी जल्दी चाहे, जा सकता था और अपनी इच्छानुसार वीरता का प्रदर्शन कर सकता था। वह आकाश में उड़ते हुए एक पक्षी के रूप में प्रकट हुआ।
He was endowed with great courage and valour. He was illuminating all directions with his radiance. He had the power to assume any form he wished. He could go wherever he wished as quickly as he wished and could display valour as per his liking. He appeared in the form of a bird flying in the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥