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mahabharat 1.23.15: देवताओं ने कहा - हे प्रभु! आप मन्त्रों को देखने वाले ऋषि हैं, आप महान् भाग्यशाली देव हैं और आप ही पतागेश्वर (पक्षियों और पशुओं के स्वामी) हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.23.15 
देवा ऊचु:
त्वमृषिस्त्वं महाभागस्त्वं देव: पतगेश्वर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने कहा - हे प्रभु! आप मन्त्रों को देखने वाले ऋषि हैं, आप महान् भाग्यशाली देव हैं और आप ही पतागेश्वर (पक्षियों और पशुओं के स्वामी) हैं॥15॥
 
The gods said - Lord! You are the sage who has seen the mantras; you are the great fortunate god and you are the Patageshwar (Lord of birds and animals).॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)