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mahabharat 1.23.10: अग्नि! इस प्रकार आगे मत बढ़ो। क्या तुम हमें जलाकर भस्म करना चाहते हो? देखो, तुम्हारा महान् प्रज्वलित प्रकाश इस दिशा में फैल रहा है।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.23.10 
अग्ने मा त्वं प्रवर्धिष्ठा: कच्चिन्नो न दिधक्षसि।
असौ हि राशि: सुमहान् समिद्धस्तव सर्पति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अग्नि! इस प्रकार आगे मत बढ़ो। क्या तुम हमें जलाकर भस्म करना चाहते हो? देखो, तुम्हारा महान् प्रज्वलित प्रकाश इस दिशा में फैल रहा है।॥10॥
 
‘Agni! Do not proceed in this manner. Do you wish to burn us to ashes? Look, your great, blazing light is spreading in this direction.’॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)