श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.229.3 
जरितोवाच
अयमग्निर्दहन् कक्षमित आयाति भीषण:।
जगत् संदीपयन् भीमो मम दु:खविवर्धन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जरिता बोली, "यह भयंकर अग्नि इस वन को जला रही है और इस ओर आ रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह समस्त जगत का नाश कर देगी। इसका स्वरूप भयानक है और यह मेरे दुःख को बढ़ा रही है।"
 
Jarita said - This terrible fire is burning this forest and is coming this way. It seems that it will destroy the whole world. Its appearance is terrifying and it is increasing my sorrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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