| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 1.229.19  | शार्ङ्गका ऊचु:
अबर्हान् मांसभूतान् न: क्रव्यादाखुर्विनाशयेत्।
पश्यमाना भयमिदं प्रवेष्टुं नात्र शक्नुम:॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | शार्ङ्गक बोले, "अभी हम पंखहीन बालक हैं, हमारा शरीर मांस का लोथड़ा मात्र है। चूहा मांसभक्षी प्राणी है, वह हमारा नाश कर देगा। इस भय से हम इस बिल में प्रवेश नहीं कर सकते॥19॥ | | | | Sharṅgaka said, "Right now we are children without wings, our body is just a lump of flesh. The rat is a carnivorous creature, it will destroy us. Due to this fear we cannot enter this hole.॥19॥ | | ✨ ai-generated | | |
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