श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.229.13 
अस्मास्विह विनष्टेषु भवितार: सुतास्तव।
त्वयि मातर्विनष्टायां न न: स्यात् कुलसंतति:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘माता! यदि हम लोग यहीं नष्ट हो जाएँ, तो भी तुम और सन्तान उत्पन्न कर सकती हो; किन्तु यदि तुम नष्ट हो जाओगी, तो हमारे कुल की परम्परा नष्ट हो जाएगी॥13॥
 
‘Mother! Even if we perish here, you can still have other children; but if you perish, the tradition of our clan will be lost.॥ 13॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas