vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 227: देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा
»
श्लोक 9-10h
श्लोक
1.227.9-10h
पिशाचान् पक्षिणो नागान् पशूंश्चैव सहस्रश:॥ ९॥
निघ्नंश्चरति वार्ष्णेय: कालवत् तत्र भारत।
अनुवाद
हे भारत! भगवान श्रीकृष्ण वहाँ मृत्यु के समान घूमते हुए हजारों भूतों, पक्षियों, नागों और पशुओं का वध कर रहे थे।
Bharat! Lord Krishna was roaming there like death, killing thousands of ghosts, birds, serpents and animals. 9 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×