vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 227: देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा
»
श्लोक 10-11h
श्लोक
1.227.10-11h
क्षिप्तं क्षिप्तं पुनश्चक्रं कृष्णस्यामित्रघातिन:॥ १०॥
छित्त्वानेकानि सत्त्वानि पाणिमेति पुन: पुन:।
अनुवाद
वह चक्र शत्रुसंहारक श्रीकृष्ण द्वारा बार-बार चलाया गया और अनेक प्राणियों का वध करके पुनः उनके हाथ में आ गया।
That discus was wielded again and again by Shri Krishna, the killer of enemies, and after killing many creatures, came back into his hands. 10 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×