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mahabharat 1.225.5: बहुत से लोगों के शरीर का कोई भाग जल गया था, बहुत से लोग आग से झुलस गए थे, किसी की आँखें फूट गई थीं और किसी के शरीर फट गए थे। ऐसी दशा में भी सभी लोग भाग रहे थे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.225.5 
दग्धैकदेशा बहवो निष्टप्ताश्च तथापरे।
स्फुटिताक्षा विशीर्णाश्च विप्लुताश्च तथापरे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोगों के शरीर का कोई भाग जल गया था, बहुत से लोग आग से झुलस गए थे, किसी की आँखें फूट गई थीं और किसी के शरीर फट गए थे। ऐसी दशा में भी सभी लोग भाग रहे थे॥5॥
 
Many people had a part of their bodies burnt, many were scorched by the fire, some had their eyes burst and some had their bodies torn. Even in such a condition, everyone was running away.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)