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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 225: खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.225.21 
ततो नमुचिहा क्रुद्धो भृशमर्चिष्मतस्तदा।
पुनरेव महामेघैरम्भांसि व्यसृजद् बहु॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब नमुचिना के संहारक भगवान इंद्र अग्नि से बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने फिर से बड़े बादलों के माध्यम से भारी वर्षा शुरू कर दी।
 
Then Lord Indra, the destroyer of Namuchina, became very angry with Agni and again started causing heavy rain to rain down through large clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)