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mahabharat 1.224.33: महाप्रभु! अब इस सम्पूर्ण वन को चारों ओर से घेरकर आज ही अपनी इच्छानुसार जला डालिए। हम आपकी सहायता के लिए तैयार हैं॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.224.33 
सर्वत: परिवार्यैवं दावमेतं महाप्रभो।
कामं सम्प्रज्वलाद्यैव कल्यौ स्व: साह्यकर्मणि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
महाप्रभु! अब इस सम्पूर्ण वन को चारों ओर से घेरकर आज ही अपनी इच्छानुसार जला डालिए। हम आपकी सहायता के लिए तैयार हैं॥ 33॥
 
Mahaprabhu! Now surround this entire forest from all sides and burn it as per your wish today itself. We are ready to help you.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)