Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.224.10: इसके अतिरिक्त वरुण ने दिव्य घोड़ों से जुता हुआ एक रथ भी प्रस्तुत किया, जिसकी ध्वजा पर एक महाकपि विराजमान था। उसमें जुते हुए घोड़े चाँदी के समान श्वेत थे। वे सभी घोड़े गंधर्व देश में उत्पन्न हुए थे और सोने की मालाओं से सुशोभित थे॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.224: अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रथं च दिव्याश्वयुजं कपिप्रवरकेतनम्।
उपेतं राजतैरश्वैर्गान्धर्वैर्हेममालिभि:॥ १०॥
अनुवाद
इसके अतिरिक्त वरुण ने दिव्य घोड़ों से जुता हुआ एक रथ भी प्रस्तुत किया, जिसकी ध्वजा पर एक महाकपि विराजमान था। उसमें जुते हुए घोड़े चाँदी के समान श्वेत थे। वे सभी घोड़े गंधर्व देश में उत्पन्न हुए थे और सोने की मालाओं से सुशोभित थे॥10॥
Apart from this, Varuna also presented a chariot drawn by divine horses, on whose flag a great ape was seated. The horses harnessed to it were as white as silver. All those horses were born in the Gandharva country and were adorned with garlands of gold.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥