श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 223: अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.223.16 
धनुर्मे नास्ति भगवन् बाहुवीर्येण सम्मितम्।
कुर्वत: समरे यत्नं वेगं यद् विषहेन्मम॥ १६॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मेरे पास अपनी भुजाओं के बल के अनुरूप धनुष नहीं है, जो युद्धभूमि में लड़ने का प्रयत्न करते समय मेरे वेग को सहन कर सके ॥16॥
 
However, I do not have a bow commensurate with my arm strength, which could withstand my speed when I try to fight in the battle-field. ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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