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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.222.79 
प्रदीप्तं खाण्डवं दृष्ट्वा ये स्युस्तत्र निवासिन:।
परमं यत्नमातिष्ठन् पावकस्य प्रशान्तये॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
खाण्डव वन को जलता देख वहाँ रहने वाले लोगों ने आग बुझाने का बहुत प्रयास किया।
 
Seeing the Khandava forest burning, the people living there made great efforts to extinguish the fire. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)