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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.222.69 
तत्र ब्रह्माणमासीनमिदं वचनमब्रवीत्।
भगवन् परमा प्रीति: कृत्वा मे श्वेतकेतुना॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बैठकर उन्होंने ब्रह्माजी से इस प्रकार कहा - 'हे प्रभु! राजा श्वेतकि ने अपने यज्ञ से मुझे अत्यंत संतुष्ट किया है।'
 
Sitting there, he addressed Brahmaji as follows - 'O Lord! King Svetaki has satisfied me immensely with his yajna. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)