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mahabharat 1.222.68: अपने को तेज से हीन देखकर अग्निदेव लोगों द्वारा पूजित ब्रह्माजी के पवित्र धाम में गए ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.222.68 
स लक्षयित्वा चात्मानं तेजोहीनं हुताशन:।
जगाम सदनं पुण्यं ब्रह्मणो लोकपूजितम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
अपने को तेज से हीन देखकर अग्निदेव लोगों द्वारा पूजित ब्रह्माजी के पवित्र धाम में गए ॥68॥
 
Seeing himself inferior in brightness, Agnidev went to the sacred abode of Brahmaji worshiped by the people. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)