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mahabharat 1.222.6: इस खाण्डव वन की रक्षा इन्द्र सदैव करते हैं। उन महामानस द्वारा रक्षित होने के कारण मैं इसे जलाने में असमर्थ हूँ।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.222.6 
इदमिन्द्र: सदा दावं खाण्डवं परिरक्षति।
न च शक्नोम्यहं दग्धुं रक्ष्यमाणं महात्मना॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस खाण्डव वन की रक्षा इन्द्र सदैव करते हैं। उन महामानस द्वारा रक्षित होने के कारण मैं इसे जलाने में असमर्थ हूँ।॥6॥
 
Indra always protects this Khandava forest. Because it is protected by that great mana, I am unable to burn it. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)