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mahabharat 1.222.47-48h: रुद्र बोले - राजेन्द्र! यदि तुम एकाग्रचित्त होकर ब्रह्मचर्य का पालन करोगे और बारह वर्षों तक अखंड घी की धारा से अग्निदेव को तृप्त करोगे, तो तुम्हें वह सब प्राप्त होगा जिसकी तुम कामना कर रहे हो।   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  1.222.47-48h 
रुद्र उवाच
समा द्वादश राजेन्द्र ब्रह्मचारी समाहित:।
सततं त्वाज्यधाराभिर्यदि तर्पयसेऽनलम्॥ ४७॥
कामं प्रार्थयसे यं त्वं मत्त: प्राप्स्यसि तं नृप।
 
 
अनुवाद
रुद्र बोले - राजेन्द्र! यदि तुम एकाग्रचित्त होकर ब्रह्मचर्य का पालन करोगे और बारह वर्षों तक अखंड घी की धारा से अग्निदेव को तृप्त करोगे, तो तुम्हें वह सब प्राप्त होगा जिसकी तुम कामना कर रहे हो।
 
Rudra said - Rajendra! If you remain focused and observe celibacy and satisfy the Lord Agni with a continuous stream of ghee for twelve years, you will get what you are praying for. 47 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)