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mahabharat 1.222.42-43h: ‘राजन्! आपका कल्याण हो। आप अपनी इच्छानुसार वर मांगिए।’ अत्यंत तेजस्वी रुद्र के ये वचन सुनकर राजा श्वेतकि ने भगवान शिव के चरणों में प्रणाम किया और इस प्रकार कहा -॥42 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  1.222.42-43h 
वरं वृणीष्व भद्रं ते यं त्वमिच्छसि पार्थिव।
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं रुद्रस्यामिततेजस:॥ ४२॥
प्रणिपत्य महात्मानं राजर्षि: प्रत्यभाषत।
 
 
अनुवाद
‘राजन्! आपका कल्याण हो। आप अपनी इच्छानुसार वर मांगिए।’ अत्यंत तेजस्वी रुद्र के ये वचन सुनकर राजा श्वेतकि ने भगवान शिव के चरणों में प्रणाम किया और इस प्रकार कहा -॥42 1/2॥
 
'King! May you be blessed. Ask for a boon of your choice.' Hearing these words of the extremely radiant Rudra, King Swetaki bowed down to the feet of Lord Shiva and said thus -॥ 42 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)