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mahabharat 1.222.40: उस महापुरुष को इस प्रकार घोर तप करते देख भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके समक्ष प्रकट हुए ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.222.40 
तं तथा नृपशार्दूलं तप्यमानं महत् तप:।
शंकर: परमप्रीत्या दर्शयामास भारत॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस महापुरुष को इस प्रकार घोर तप करते देख भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके समक्ष प्रकट हुए ॥40॥
 
India Seeing that great man doing great penance in this manner, Lord Shankar became very pleased and appeared before him. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)