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mahabharat 1.222.37: हे राजन! कठोर व्रत रखने वाले राजा श्वेतकि ने बहुत दिनों तक निराहार रहकर मन और इन्द्रियों को संयमित करके भगवान महादेव की आराधना की।   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.222.37 
आराधयन् महादेवं नियत: संशितव्रत:।
उपवासपरो राजन् दीर्घकालमतिष्ठत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कठोर व्रत रखने वाले राजा श्वेतकि ने बहुत दिनों तक निराहार रहकर मन और इन्द्रियों को संयमित करके भगवान महादेव की आराधना की।
 
O King! King Swetaki, who observed a strict fast, stood without any food for many days, worshipping Lord Mahadev with restraint of his mind and senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)