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mahabharat 1.222.36: ब्राह्मणों की यह निन्दा सुनकर राजा श्वेतकि अत्यन्त क्रोधित हो गए और कैलाश पर्वत पर जाकर घोर तपस्या करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.222.36 
साधिक्षेपं वच: श्रुत्वा संक्रुद्ध: श्वेतकिर्नृप:।
कैलासं पर्वतं गत्वा तप उग्रं समास्थित:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों की यह निन्दा सुनकर राजा श्वेतकि अत्यन्त क्रोधित हो गए और कैलाश पर्वत पर जाकर घोर तपस्या करने लगे।
 
Hearing these slanderous remarks of the Brahmins, King Swetaki became very angry. He went to Mount Kailash and started performing severe penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)