Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.222.30: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं कर्म का आकांक्षी होकर सत्य वचनों से आपको प्रसन्न करके, सान्त्वना देकर तथा दान आदि की बात कहकर अपना कर्म आपको अर्पित कर रहा हूँ॥30॥ | mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं कर्म का आकांक्षी होकर सत्य वचनों से आपको प्रसन्न करके, सान्त्वना देकर तथा दान आदि की बात कहकर अपना कर्म आपको अर्पित कर रहा हूँ॥30॥
'O noble Brahmin! Being a seeker of work, I am offering my work to you by pleasing you with truthful words, by consoling you and talking about giving alms etc.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥