Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.222.11: तुम दोनों ही उत्तम अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग में निपुण हो। इसलिए जब मैं इस वन को जलाने लगूँगा, तब तुम सब लोग ऊपर से गिरने वाली जलधाराओं को तथा इस वन से निकलकर सब दिशाओं में भागने वाले पशुओं को रोक दोगे॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.222: अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युवां ह्युदकधारास्ता भूतानि च समन्तत:।
उत्तमास्त्रविदौ सम्यक् सर्वतो वारयिष्यथ:॥ ११॥
अनुवाद
तुम दोनों ही उत्तम अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग में निपुण हो। इसलिए जब मैं इस वन को जलाने लगूँगा, तब तुम सब लोग ऊपर से गिरने वाली जलधाराओं को तथा इस वन से निकलकर सब दिशाओं में भागने वाले पशुओं को रोक दोगे॥11॥
Both of you are experts in the use of the best weapons. Therefore, when I start burning this forest, you all will stop the streams of water falling from above and the animals coming out of this forest and running in all directions. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥