श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.221.16 
वासुदेव उवाच
कुन्तीमातर्ममाप्येतद् रोचते यद् वयं जले।
सुहृज्जनवृता: पार्थ विहरेम यथासुखम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वसुदेव बोले - कुन्तीपुत्र! मेरी भी ऐसी ही इच्छा है कि हम लोग अपने मित्रों के साथ वहाँ जाकर जलक्रीड़ा का आनन्द लें॥ 16॥
 
Vasudev said - Kunti's son! I too have a similar desire that we should go there with our friends and enjoy the water sports.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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