श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक d2-16h
 
 
श्लोक  1.220.d2-16h 
स्पृष्ट्वा च चरणौ राज्ञो भीमस्य च धनंजय:।
यमाभ्यां वन्दितो हृष्ट: सस्वजे तौ ननन्द च॥ )
अभिगम्य च राजानं नियमेन समाहित:॥ १५॥
अभ्यर्च्य ब्राह्मणान् पार्थो द्रौपदीमभिजग्मिवान्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने राजा युधिष्ठिर और भीम के चरण स्पर्श किए। तत्पश्चात नकुल और सहदेव ने आकर अर्जुन को प्रणाम किया। अर्जुन भी प्रसन्नता से भर गए और उन्हें गले लगा लिया और उनसे मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए। फिर वहाँ राजा से मिलकर उन्होंने नियमित और एकाग्र मन से ब्राह्मणों का पूजन किया। तत्पश्चात वे द्रौपदी के पास गए।
 
After this he touched the feet of King Yudhishthira and Bhima. Thereafter Nakula and Sahadeva came and bowed down to Arjuna. Arjuna too was filled with joy and embraced them and felt very happy on meeting them. Then after meeting the king there he worshipped the Brahmins with a regular and concentrated mind. After that he went near Draupadi.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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