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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक d1
श्लोक
1.220.d1
पूर्णे तु द्वादशे वर्षे खाण्डवप्रस्थमागत:।
(ववन्दे धौम्यमासाद्य मातरं च धनंजय:॥
अनुवाद
बारहवें वर्ष की समाप्ति पर वे खाण्डवप्रस्थ आये और धौम्यजी के पास जाकर उन्हें तथा माता कुन्ती को प्रणाम किया।
After the completion of the twelfth year, he came to Khandavprastha. He went to Dhoumyaji and bowed down to him and mother Kunti.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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