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mahabharat 1.220.9-11h: इस समय अर्जुन के पास मेरा प्रसिद्ध रथ, मेरे अद्भुत घोड़े हैं और अर्जुन स्वयं भी शीघ्रता से अस्त्र चलाने वाला योद्धा है। ऐसी स्थिति में अर्जुन की बराबरी कौन कर सकता है? तुम सब लोग प्रसन्नतापूर्वक दौड़कर धनंजय को बड़ी सांत्वना देते हुए वापस ले आओ। यही मेरी परम सलाह है। 9-10 1/2।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 9-11h
 
 
श्लोक  1.220.9-11h 
स च नाम रथस्तादृङ्मदीयास्ते च वाजिन:॥ ९॥
योद्धा पार्थश्च शीघ्रास्त्र: को नु तेन समो भवेत्।
तमभिद्रुत्य सान्त्वेन परमेण धनंजयम्॥ १०॥
न्यवर्तयत संहृष्टा ममैषा परमा मति:।
 
 
अनुवाद
इस समय अर्जुन के पास मेरा प्रसिद्ध रथ, मेरे अद्भुत घोड़े हैं और अर्जुन स्वयं भी शीघ्रता से अस्त्र चलाने वाला योद्धा है। ऐसी स्थिति में अर्जुन की बराबरी कौन कर सकता है? तुम सब लोग प्रसन्नतापूर्वक दौड़कर धनंजय को बड़ी सांत्वना देते हुए वापस ले आओ। यही मेरी परम सलाह है। 9-10 1/2।
 
‘At this time Arjuna has my famous chariot, my wonderful horses and Arjuna himself is a warrior who can wield weapons swiftly. In such a situation who can match Arjuna? You all should run happily and bring Dhananjaya back with great consolation. This is my ultimate advice. 9-10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)