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mahabharat 1.220.88: ब्रह्मचर्य व्रत का कठोरता से पालन करते हुए उन बालकों ने धौम्य ऋषि से वेदों का अध्ययन करके अर्जुन से दिव्य एवं मानवीय धनुर्वेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.220.88 
कृत्वा च वेदाध्ययनं तत: सुचरितव्रता:।
जगृहु: सर्वमिष्वस्त्रमर्जुनाद् दिव्यमानुषम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचर्य व्रत का कठोरता से पालन करते हुए उन बालकों ने धौम्य ऋषि से वेदों का अध्ययन करके अर्जुन से दिव्य एवं मानवीय धनुर्वेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया।
 
Having strictly observed the vow of celibacy, those boys, after having studied the Vedas from the sage Dhoumya, acquired the complete knowledge of the divine and human Dhanurveda from Arjuna. 88
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)