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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक 84
श्लोक
1.220.84
शतानीकस्य राजर्षे: कौरव्यस्य महात्मन:।
चक्रे पुत्रं सनामानं नकुल: कीर्तिवर्धनम्॥ ८४॥
अनुवाद
नकुल ने अपने यशस्वी पुत्र का नाम कौरवकुल के महामुनि शतानीक के नाम पर शतानीक रखा ॥84॥
Nakula named his famous son Shatanika after the great sage Shatanika of Kaurava clan. 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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