श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.220.83 
श्रुतं कर्म महत् कृत्वा निवृत्तेन किरीटिना।
जात: पुत्रस्तथेत्येवं श्रुतकर्मा ततोऽभवत्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
किरीटधारी अर्जुन महान् और यशस्वी कर्म करके लौटे और द्रौपदी से पुत्र उत्पन्न किया, इसलिए उनके पुत्र का नाम श्रुतकर्मा रखा गया ॥83॥
 
Crowned Arjuna returned after performing great and famous deeds and begot a son from Draupadi, hence his son was named Shrutakarma. 83॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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