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mahabharat 1.220.8-9h: आर्य! इन्द्रलोक और रुद्रलोक सहित सम्पूर्ण लोकों में भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले विकराल नेत्रों वाले भगवान रुद्र के अतिरिक्त मैं किसी अन्य को नहीं देखता, जो युद्ध में बलपूर्वक पार्थ को परास्त कर सके। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  1.220.8-9h 
न च पश्यामि य: पार्थं विजयेत रणे बलात्।
वर्जयित्वा विरूपाक्षं भगनेत्रहरं हरम्॥ ८॥
अपि सर्वेषु लोकेषु सेन्द्ररुद्रेषु मारिष।
 
 
अनुवाद
आर्य! इन्द्रलोक और रुद्रलोक सहित सम्पूर्ण लोकों में भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले विकराल नेत्रों वाले भगवान रुद्र के अतिरिक्त मैं किसी अन्य को नहीं देखता, जो युद्ध में बलपूर्वक पार्थ को परास्त कर सके। 8 1/2॥
 
'Arya! In all the worlds including Indralok and Rudralok, except Lord Rudra with the monstrous eyes who destroys the eyes of Bhagdevta, I do not see anyone else who can defeat Partha by force in battle. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)